Monday, 3 September 2007

Intezaar

इंतज़ार नही करना चाहती
मगर दिल नही
मानाता

हर घड़ी दर लगा रहता है,
अगर इंतज़ार नह करो
तोह?
हर आहट से उम्मीद लगा
बैठी हूँ मैं, मगर दिल में
दर बैठा है।

अगर इंतज़ार नह करो
तोह? आंसूं सूख chuke
hai , दिमाग थक चूका है।
मगर में आस अभी है,
उसके आने कि।


लेकिन दर रहता है, इस
बात का, अगर इंतज़ार
नह करो तोह? और वोह
आये और बिन बताए
चले जाये?

तोह क्या हुआ, अब
आंखों में आँसू नही
आते, उसका इंतज़ार
तोह है।
कोई आहट उसकी
नही है, उम्मीद तोह
है।
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